डेली करेंट अफेयर्स
1 नवंबर 2026
राजस्थान एकीकरण का 70वां वर्ष (1 नवंबर 1956), आवश्यक दवाओं की सूची में 200 नई जीवनरक्षक दवाएं, सौर ऊर्जा में राजस्थान 24 GW के साथ शीर्ष पर, दिसंबर परीक्षाओं हेतु RPSC-RSSB बायोमेट्रिक एसओपी, पीएम-कुसुम से मत्स्य अंचल में दिन में बिजली, व COP16 समझौता।
दैनिक समसामयिकी अंक
1 नवंबर 2026
6 मुख्य परीक्षा विश्लेषण बिन्दु
राज्य स्तरीय (राजस्थान)
- 01 [राजव्यवस्था] · RAS · UPSC · Police SI · RPSC शिक्षकSource: DIPR राजस्थान / राज्य अभिलेखागार बीकानेर
राजस्थान स्थापना व एकीकरण पूर्णता दिवस (1 नवंबर 1956): 70 वर्ष पूर्ण; 7वें चरण में अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा और सुनेल टप्पा के ऐतिहासिक विलय का स्मरण
Rajasthan Integration Milestone (1 November 1956): 70th anniversary; recalling the 7th phase merger of Ajmer-Merwara, Abu-Delwara and Sunel Tappa
- 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन आयोग (फज़ल अली आयोग) की सिफारिशों पर लागू 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956' के तहत राजस्थान के एकीकरण का सातवां और अंतिम चरण संपन्न हुआ था।
- इस ऐतिहासिक चरण में केंद्र-शासित 'अजमेर-मेरवाड़ा' (सी-श्रेणी राज्य), बंबई राज्य से 'आबू-देलवाड़ा' तहसील तथा मध्य भारत के मंदसौर जिले का 'सुनेल टप्पा' क्षेत्र राजस्थान में शामिल किया गया; जबकि झालावाड़ का 'सिरोंज' उपखंड मध्य प्रदेश को सौंपा गया।
- 1 नवंबर 1956 को ही राज्य में 7वें संविधान संशोधन के द्वारा 'राजप्रमुख' का पद समाप्त कर 'राज्यपाल' का संवैधानिक पद सृजित किया गया, तथा सरदार गुरुमुख निहाल सिंह राजस्थान के प्रथम राज्यपाल बने।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: राजस्थान एकीकरण के सातों चरण (18 मार्च 1948 से 1 नवंबर 1956), राज्य पुनर्गठन आयोग, राजप्रमुख से राज्यपाल व्यवस्था का संवैधानिक परिवर्तन RPSC RAS (GS-1 इतिहास व GS-2 राजव्यवस्था) का सर्वाधिक महत्वपूर्ण परीक्षा क्षेत्र हैं।स्रोत पुष्टि: DIPR राजस्थान / राज्य अभिलेखागार बीकानेर Share - 02 [राजस्थान] · RAS · Police SI · RPSC शिक्षकSource: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान / DIPR
राजस्थान निःशुल्क दवा एवं जांच योजना: आवश्यक औषधियों की सूची में 200 नई जीवनरक्षक दवाएं शामिल; ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों का डिजिटलीकरण
Rajasthan Free Medicine & Diagnostic Scheme: 200 new life-saving drugs added to essential medicine list; digitizing rural primary health units
- राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड (RMSCL) द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में आवश्यक दवा सूची (EDL) का विस्तार किया गया।
- नई सूची में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर प्रतिरोधी और बाल चिकित्सा से जुड़ी उन्नत औषधियों को शामिल किया गया है, जिनका वितरण ई-औषधि (e-Aushadhi) सॉफ्टवेयर के माध्यम से बारकोडेड ट्रैकिंग द्वारा किया जा रहा है।
- मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA Yojana) के साथ समन्वय स्थापित कर अब उप-स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक 50 से अधिक निःशुल्क प्राथमिक रक्त व नैदानिक जांचें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: राजस्थान का सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल, निःशुल्क दवा एवं जांच योजना, स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health) परिप्रेक्ष्य, SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य व कल्याण) RAS मुख्य परीक्षा (GS-3 अर्थव्यवस्था) और निबंध हेतु अति-महत्वपूर्ण हैं।स्रोत पुष्टि: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान / DIPR Share - 03 [पर्यावरण] · UPSC · RAS · SSCSource: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) / PIB
सीओपी-29 (COP29) से पूर्व वैश्विक जलवायु रिपोर्ट: राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में देश में 24,000 मेगावाट क्षमता के साथ प्रथम स्थान पर कायम
Pre-COP29 Global Climate Outlook: Rajasthan retains top rank in India's total utility-scale solar power generation with over 24 GW capacity
- केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार राजस्थान 24,000 मेगावाट से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना हुआ है।
- बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर में स्थापित अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी सोलर पार्कों (UMREPP) से उत्पादित हरित ऊर्जा को राष्ट्रीय हरित ऊर्जा गलियारे (Green Energy Corridor) के माध्यम से देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों को भेजा जा रहा है।
- वैश्विक जलवायु सम्मेलन COP29 की तैयारियों के बीच भारत द्वारा 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य में राजस्थान का योगदान 20% से अधिक रहने का अनुमान है।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: भारत का एनडीसी (NDC) लक्ष्य, गैर-जीवाश्म ऊर्जा, सौर ऊर्जा उत्पादन, राजस्थान की भौगोलिक स्थिति (325+ धूप दिवस), हरित ऊर्जा गलियारा और जलवायु परिवर्तन UPSC (GS-3 पर्यावरण व अर्थव्यवस्था) तथा RAS में अनिवार्य विषय हैं।स्रोत पुष्टि: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) / PIB Share - 04 [राजस्थान] · RAS · Police SI · RPSC शिक्षक · SSCSource: RPSC अजमेर / RSSB जयपुर आधिकारिक विज्ञप्ति
RPSC एवं RSSB परीक्षा सुधार: आगामी दिसंबर परीक्षाओं हेतु सख्त बायोमेट्रिक सत्यापन और 5वें विकल्प ओएमआर नियमों पर दिशा-निर्देश
RPSC & RSSB Exam Reforms: Strict biometric verification and 5th option OMR compliance guidelines issued for December examinations
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा आगामी 1-3 दिसंबर को होने वाली CET 12वीं स्तर तथा 6 दिसंबर को प्रस्तावित RAS प्रारंभिक परीक्षा 2026 के लिए संयुक्त सुरक्षा एसओपी (SOP) जारी की गई।
- परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और लाइव फेशियल रिकग्निशन अनिवार्य किया गया है, ताकि डमी अभ्यर्थियों और प्रतिरूपण (Impersonation) को पूर्णतः रोका जा सके।
- ओएमआर शीट में किसी भी प्रश्न को खाली छोड़ने पर अंक कटौती (1/3 नेगेटिव मार्किंग) से बचने हेतु 5वें विकल्प ('अनुत्तरित प्रश्न') को नीले बॉलपॉइंट पेन से भरना अनिवार्य रहेगा; 10% से अधिक प्रश्न खाली छोड़ने पर अभ्यर्थी अयोग्य घोषित होगा।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, नकल विरोधी कानून (राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2022 व संशोधित कड़े प्रावधान), आयोगों की स्वायत्तता और परीक्षा सुधार RPSC RAS व राज्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए प्रत्यक्षतः अनिवार्य हैं।स्रोत पुष्टि: RPSC अजमेर / RSSB जयपुर आधिकारिक विज्ञप्ति Share - 05 [अर्थव्यवस्था] · RAS · UPSC · Police SISource: ऊर्जा विभाग, राजस्थान / ऊर्जा मंत्रालय
पीएम कुसुम योजना (PM-KUSUM): राजस्थान के कृषि फीडरों का 100% सौरीकरण लक्ष्य; मत्स्य अंचल के किसानों को दिन में निर्बाध बिजली
PM-KUSUM Scheme: 100% solarization of agricultural feeders targeted in Rajasthan; daytime electricity for farmers in Matsya region
- जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) द्वारा पीएम-कुसुम योजना के घटक-सी (Component-C / फीडर लेवल सोलराइजेशन) के तहत अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के ग्रामीण सब-स्टेशनों पर सोलर प्लांट चालू किए गए।
- इससे किसानों को रात्रि के स्थान पर दिन के समय 6 से 8 घंटे गुणवत्तापूर्ण 3-फेज कृषि बिजली उपलब्ध हो रही है, जिससे सिंचाई की सुगमता बढ़ी है और वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के तकनीकी नुकसान (AT&C losses) में कमी आई है।
- सौर संयंत्र लगाने वाले किसानों को 'कुसुम-ए' के अंतर्गत बंजर भूमि पर उत्पादित अतिरिक्त सौर बिजली ग्रिड को बेचकर प्रतिवर्ष निश्चित आय प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: कृषि में ऊर्जा सुरक्षा, पीएम कुसुम योजना, डिस्कॉम सुधार, किसानों की आय संवर्धन के उपाय और ग्रामीण बुनियादी ढांचा RPSC RAS (GS-3 अर्थव्यवस्था) और UPSC के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन बिंदु हैं।स्रोत पुष्टि: ऊर्जा विभाग, राजस्थान / ऊर्जा मंत्रालय Share
अंतरराष्ट्रीय
- 01 [अंतरराष्ट्रीय] · UPSC · RASSource: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) / पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC)
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (COP16): कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 30x30 लक्ष्य और आनुवंशिक डेटा से लाभ-साझाकरण समझौते पर सहमति
UN Biodiversity Conference (COP16): Nations advance Kunming-Montreal 30x30 targets and digital sequence information benefit-sharing fund
- कोलंबिया के कैली (Cali) में संपन्न हुए संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (COP16) में 2030 तक दुनिया की 30% भूमि, अंतर्देशीय जल और महासागरों को संरक्षित करने के '30x30' लक्ष्य के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई।
- आनुवंशिक संसाधनों की डिजिटल अनुक्रम जानकारी (DSI) से दवा और कृषि कंपनियों द्वारा अर्जित मुनाफे में से विकासशील देशों और स्वदेशी समुदायों के साथ लाभ साझा करने हेतु एक नए वैश्विक 'कैली फंड' (Cali Fund) पर ऐतिहासिक सहमति बनी।
- भारत ने अपने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (TKDL) और सामुदायिक वन अधिकार (CFR) मॉडल को वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण: कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (CBD), कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और पारंपरिक ज्ञान (TKDL) UPSC (GS-3 पर्यावरण) व RAS मुख्य परीक्षा का अनिवार्य पाठ्यक्रम हैं।
1 नवंबर 2026: समसामयिक परिदृश्य एवं मुख्य परीक्षा विशेष विश्लेषण
1. राजस्थान एकीकरण का 7वां चरण: 1 नवंबर 1956 का संवैधानिक व प्रशासनिक पुनर्गठन
1 नवंबर 1956 को आधुनिक राजस्थान के वर्तमान भौगोलिक और प्रशासनिक स्वरूप ने पूर्णता प्राप्त की थी।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व फज़ल अली आयोग: स्वतंत्रता के समय ब्रिटिश भारत का ‘अजमेर-मेरवाड़ा’ क्षेत्र एक ‘सी’ (C) श्रेणी का स्वतंत्र केंद्र-शासित राज्य था, जिसकी अपनी 30 सदस्यीय विधानसभा थी जिसे ‘धारा सभा’ कहा जाता था और हरिभाऊ उपाध्याय इसके एकमात्र मुख्यमंत्री (प्रधानमंत्री) थे। राज्य पुनर्गठन आयोग (अध्यक्ष: न्यायमूर्ति फज़ल अली; सदस्य: पं. हृदयनाथ कुंजरू व के.एम. पणिक्कर) की संस्तुतियों के आधार पर अजमेर-मेरवाड़ा का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ।
- क्षेत्रीय विनिमय: बंबई प्रांत में शामिल की गई सिरोही रियासत की ‘आबू एवं देलवाड़ा’ तहसीलों को राजस्थान की जनता के प्रबल जन-आंदोलन के बाद पुनः राजस्थान में शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त मध्य भारत के मंदसौर जिले के भानपुरा तहसील का ‘सुनेल टप्पा’ राजस्थान (झालावाड़) में मिलाया गया, जबकि झालावाड़ जिले का ‘सिरोंज’ क्षेत्र मध्य प्रदेश को दिया गया।
- संवैधानिक परिवर्तन: 7वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा राज्यों के ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ श्रेणियों के विभाजन को समाप्त किया गया। परिणामस्वरूप राजस्थान में ‘राजप्रमुख’ (सवाई मानसिंह द्वितीय) का पद समाप्त होकर ‘राज्यपाल’ का पद सृजित हुआ। 1 नवंबर 1956 को सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ने राजस्थान के प्रथम राज्यपाल तथा मोहनलाल सुखाड़िया ने पूर्ण एकीकृत राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
2. स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में राजस्थान का नेतृत्व एवं हरित ऊर्जा गलियारा
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मानचित्र पर राजस्थान एक वैश्विक हब के रूप में उभरा है।
- भौगोलिक अनुकूलता: राजस्थान में प्रतिवर्ष 325 से अधिक धूप वाले दिन और 5.72 kWh/m²/day का सौर विकिरण प्राप्त होता है। राज्य की सैद्धांतिक सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 142 गीगावाट (GW) आंकी गई है, जो देश में सर्वाधिक है।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC): पश्चिमी राजस्थान में उत्पादित 24,000+ मेगावाट सौर ऊर्जा को अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) द्वारा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे उच्च ऊर्जा मांग वाले राज्यों को भेजा जा रहा है।
- कृषि व ग्रामीण आजीविका: पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों का सौरीकरण किसानों को दिन में सस्ती बिजली सुनिश्चित कर रहा है, जिससे रात्रिकालीन सिंचाई के जोखिम (सर्प दंश, ठंड, जल अपव्यय) समाप्त हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष गति मिल रही है।